सिकंदराबाद में छठ महापर्व की धूम, कृष्ण तालाब पर श्रद्धालुओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्यता की कामना की। नगर में भक्ति और आस्था का माहौल छाया रहा।
सिकंदराबाद: नगर में चार दिवसीय छठ महापर्व बड़े ही श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। मंगलवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर श्रद्धालुओं ने छठ माता से परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्यता और मंगल की कामना की।
नगर के कृष्ण तालाब पर दिनभर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। मंदिर परिसर में पूरे दिन भक्ति और आस्था का माहौल छाया रहा। सुबह से ही महिलाएँ पारंपरिक परिधान पहनकर पूजा सामग्री के साथ तालाब की ओर जाती नजर आईं। घाटों पर सजाए गए मिट्टी के दीपक, गन्ना, नारियल, केले, ठेकुआ और अन्य प्रसाद से भरे टोकरे भक्तिभाव से चमक उठे।
भक्तों ने लोकगीतों और मंत्रोच्चार के साथ सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित किया। कृष्ण तालाब मंदिर पर बने घाटों को दीपों और झालरों से सजाया गया था। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नगर पालिका और स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से विशेष इंतज़ाम किए गए — जिनमें साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा और सेवा शिविर शामिल थे। शिविरों में श्रद्धालुओं को जल, प्रसाद वितरण और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।
महिलाओं ने व्रत के चौथे दिन सूर्यास्त के समय अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारायण किया। मंगलवार की सुबह उदयीमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर छठ पूजा का समापन किया जाएगा।
घाटों पर “केलवा जेकर भइल जन्मे पार” और “उगी हे सुरज देव” जैसे पारंपरिक गीतों की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो उठा। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने इस पर्व की गरिमा में सहभागिता निभाई।
नालंदा, बिहार के पंकज सिंह ने बताया कि कृष्ण तालाब पर हर वर्ष की तरह इस बार भी छठ महापर्व अत्यंत हर्षोल्लास और भक्ति भाव से मनाया गया। कई परिवारों ने अपने घरों के आंगनों में भी कृत्रिम घाट बनाकर छठ माई की पूजा की।
पूरे नगर में छठ पूजा के अवसर पर स्वच्छता और सांप्रदायिक एकता की मिसाल देखने को मिली। विभिन्न समुदायों के लोगों ने मिलकर घाटों की सजावट और सफाई में योगदान दिया।
भक्तों का कहना था कि छठ माता की कृपा से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है तथा यह पर्व जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करता है।
