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सिकंदराबाद: मृत्यु के बाद भी महेश चंद जैन बने अनेक जीवनों के सहायक, परिवार ने किया देहदान

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सिकंदराबाद निवासी महेश चंद जैन ने मृत्यु से पूर्व देहदान का संकल्प लिया था। परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा पूरी करते हुए पार्थिव शरीर कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज को चिकित्सीय अध्ययन हेतु सौंपा। देहदान जागरूकता का प्रेरणादायक उदाहरण।


सिकंदराबाद: कहा जाता है कि इंसान दुनिया से विदा लेने के बाद भी दूसरों के काम आ सकता है। ऐसा ही नेक उदाहरण सिकंदराबाद निवासी महेश चंद जैन ने स्थापित किया है। जीवनकाल में ही उन्होंने स्वेच्छा से देहदान का आवेदन किया था, और उनकी मृत्यु के बाद उनके परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा पूरी करते हुए समाज के प्रति महान संदेश दिया है।

मंगलवार को परिजनों ने महेश चंद जैन के पार्थिव शरीर को कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज को चिकित्सीय अध्ययन हेतु सौंप दिया। मेडिकल कॉलेज के ओएसडी डॉ.विनोद कुमार ने बताया कि “एक व्यक्ति के अंगदान से छह से आठ लोगों की जान बचाई जा सकती है। साथ ही 18 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति अंगदान और देहदान कर सकता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि जिले में राष्ट्र चेतना मिशन सहित कई संगठन देहदान के प्रति लोगों को जागरूक करने का अभियान चला रहे हैं।

मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. मनीष जिंदल ने बताया कि केसरीवाड़ा, सिकंदराबाद निवासी 82 वर्षीय महेश चंद जैन ने मृत्यु से पूर्व ही देहदान की इच्छा जताते हुए आवेदन किया था। उनकी मृत्यु के बाद परिजनों ने मंगलवार को उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए पार्थिव शरीर को मेडिकल कॉलेज में अध्ययन हेतु सौंप दिया।

इस दौरान एनाटॉमी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. फतेह और उप प्रधानाचार्य डॉ. रोहित कुमार सहित अन्य स्टाफ मौजूद रहा। महेश चंद जैन का यह महान कदम समाज के लिए प्रेरणा है तथा देहदान जैसे पुण्य कार्य की महत्ता को दर्शाता है।


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