सिकंदराबाद। नर्मदेश्वर आश्रम भराना मे चल रही सातवें दिन श्री मद भागवत कथा के अंतर्गत आचार्य राकेश कृष्ण शास्त्री ने कथा में कहा कि जब भी हम आदर्श मित्रता की बात करते है तो सुदामा और श्री कृष्ण की मित्रता याद आ जाती है। सुदामा और कृष्ण का प्रेम स्मरण हो जाता है। भस्मासुर हिन्दू पौराणिक कथाओ में वर्णित एक राक्षस था जिसे स्वयं भगवान शिव का वरदान था कि वह जिसके भी सिर पर भी हाथ रखेगा वह भस्म हो जायगा।

कथा के बीच मे कथा व्यास और व्यास पीठ का सम्मान संघ परिवार से योगेंद्र शर्मा, आशीष उपाध्याय, मनोज पावड़िया, एडवोकेट राजेश सोलंकी, राजकुमार शर्मा, टीटू पूर्व जिला पंचायत सदस्य ने कथा व्यास और सभी संत दंडी स्वामी का किया। कथा व्यास राकेश कृष्ण शास्त्री ने भी सभी संघ के लोगों को पटका पहनाकर आशीर्वाद दिया। आचार्य ने सातवे दिन श्री कृष्ण जी के विवाह, सुदामा चरित्र, भस्मासुर की कथा, नवयोगेश्वर की कथा परीछत मोछ, श्री मदभागवत कथा को पुरनाव्रती पर विस्तार से प्रकाश डाला। कथा में बोलते हुए कथा व्यास ने कहा कि पतझड़ के बाद बसंत स्वतः आएगा। यह प्रकृति का स्वभाव है। जीवन में जब तक पुराना नहीं आएगा तब तक नए आने की संभावना भी नग्नय रहती है । अर्जन और विसर्जन यह मनुष्य के दो अहम पहलू है पेड़ कभी इस बात पर व्यथित नहीं होता है उसने कितने फूल अथवा कितने पत्ते खो दिए हैं वह सदैव नए फूल और पत्तों के सृजन में व्यस्त रहता हैं। नदिया भी कभी इस बात का शोक नहीं करती कि प्रतिफल कितना जल प्रवाहित हो गया। वह भी सदैव उसी बेग से लोक मंगल हेतु परवाह मान बनी रहती हैं।
