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सिकंदराबाद: विद्या भारती की शिक्षा पद्धति का शिक्षाविदों ने किया अवलोकन

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वंदना, योग एवं गतिविधि आधारित शिक्षण की सराहना; विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को बताया महत्वपूर्ण

सिकंदराबाद। नगर के गुलावठी रोड स्थित दयावती दीवान सिंह शुक्ल सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में मंगलवार को विद्या भारती की योजना के अंतर्गत विश्वविद्यालयों एवं विभिन्न शिक्षण संस्थानों से आए शिक्षाविदों ने विद्यालय की शिक्षण पद्धति एवं संस्कार पक्ष का अवलोकन किया। अतिथियों ने वंदना सत्र, योगाभ्यास तथा विद्यार्थियों के साथ कराई गई विभिन्न गतिविधियों को देखा और विद्यालय के अनुशासित एवं संस्कारमय वातावरण की सराहना की।

कार्यक्रम में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ की रिसर्च एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रान्क्षी दीक्षित, ग्लोबल स्कूल गुरुग्राम की अध्यापिका रिशु शर्मा तथा किसान पी.जी. कॉलेज, बलिया के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रमोद कुमार एवं डॉ. राम सिंह उपस्थित रहे। सरस्वती बालिका विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य रामकरण दक्ष भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

वंदना सत्र के पश्चात विद्यालय परिवार की ओर से सभी अतिथियों का पटका पहनाकर एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर स्वागत किया गया। इसके बाद विद्यार्थियों ने योगाभ्यास प्रस्तुत किया। शिक्षाविदों ने योग एवं अन्य गतिविधियों का अवलोकन करते हुए विद्यार्थियों के अनुशासन और उत्साह की प्रशंसा की।

सरस्वती शिशु मंदिर की छात्रा होने से पुरानी स्मृतियां हुईं ताजा

डॉ. प्रान्क्षी दीक्षित ने अपने संबोधन में कहा कि वह स्वयं सरस्वती शिशु मंदिर की छात्रा रही हैं। इसलिए विद्या भारती के विद्यालय में आकर उनके विद्यार्थी जीवन की पुरानी स्मृतियां ताजा हो गईं। उन्होंने कहा कि यहां वंदना, योग, अनुशासन और विद्यार्थियों में दिखाई देने वाले संस्कार अत्यंत प्रभावित करने वाले हैं।

उन्होंने कहा कि विद्या भारती की शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार, नैतिकता, आत्मविश्वास, राष्ट्रभावना और जीवन-मूल्यों का विकास भी करती है। उन्होंने गतिविधि आधारित एवं सर्वांगीण शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि विद्या भारती के विद्यालय इन अवधारणाओं को लंबे समय से व्यवहार में उतार रहे हैं।

गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों की प्रतिभा को परखा

विद्यालय के प्रधानाचार्य राजीव गुप्ता ने विद्यार्थियों के साथ विभिन्न गतिविधियां कराईं। मुहावरों पर आधारित गतिविधि में एक विद्यार्थी ने मुहावरे का भाव चित्र के माध्यम से प्रस्तुत किया, जबकि दूसरे विद्यार्थी ने चित्र देखकर मुहावरे की पहचान करते हुए उसका अर्थ बताया। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों की कल्पनाशक्ति, भाषा-ज्ञान, त्वरित सोच एवं अभिव्यक्ति क्षमता को विकसित करने का प्रयास किया गया।

इसके अलावा सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी, प्रेरक प्रसंग वाचन, समूह चर्चा, संस्कार एवं नैतिक मूल्यों पर आधारित प्रश्न, योगाभ्यास तथा देशभक्ति गीतों से संबंधित गतिविधियां भी कराई गईं। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपने विचार व्यक्त किए और प्रश्नों के उत्तर दिए।

प्रधानाचार्य राजीव गुप्ता ने कहा कि विद्या भारती का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल विषयगत ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें संस्कारवान, अनुशासित, आत्मविश्वासी और राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिक बनाना है। वंदना, योग, गतिविधि आधारित शिक्षण एवं संस्कार पक्ष इसी उद्देश्य को साकार करने के प्रभावी माध्यम हैं।

शिक्षाविदों ने गतिविधि आधारित शिक्षण की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां विद्यार्थियों को विषयों को सहज और रोचक ढंग से समझने के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व एवं आत्मविश्वास के विकास में भी सहायक होती हैं।

कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्य राजीव गुप्ता ने सभी अतिथियों का विद्यालय आगमन एवं मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया। सामूहिक ‘वंदे मातरम्’ गान के साथ कार्यक्रम का गरिमापूर्ण समापन हुआ।


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