सिकंदराबाद: पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। सिकंदराबाद थाने में तैनात रहे कुछ पुलिसकर्मियों के खिलाफ अपहरण, मारपीट, जबरन वसूली और भ्रष्टाचार समेत कई गंभीर आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई एक पीड़ित की शिकायत पर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के बाद की गई।
जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता सलमान ने पूरे मामले की शिकायत डीआईजी कलानिधि नैथानी से की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि 30 अप्रैल 2026 को सिकंदराबाद थाने में तैनात पुलिसकर्मी उसे गुलावठी टोल प्लाजा के पास से जबरन अपने साथ ले गए और थाने लाकर उससे बड़ी रकम की मांग की।
पीड़ित का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उससे 20 लाख रुपये की रंगदारी मांगी। रकम नहीं देने पर उसे झूठे एनडीपीएस (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट) के मुकदमे में फंसाने और पैर में गोली मारकर फर्जी मुठभेड़ दिखाने की धमकी दी गई। शिकायत में यह भी कहा गया है कि उसके भतीजे के साथ भी मारपीट की गई और दोनों पर कई घंटे तक दबाव बनाया गया।
शिकायत के मुताबिक, देर रात करीब 3 बजे 6 लाख रुपये लेने के बाद ही दोनों को कथित रूप से पुलिस हिरासत से छोड़ा गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी के निर्देश पर सिकंदराबाद थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर में तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक नीरज मलिक, उपनिरीक्षक अरुण कुमार, कांस्टेबल योगेश तथा चार अन्य अज्ञात पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया है।
आरोपियों पर अपहरण, मारपीट, जबरन वसूली और भ्रष्टाचार से संबंधित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के बाद अब पूरे प्रकरण की जांच की जाएगी और शिकायत में लगाए गए आरोपों की सच्चाई साक्ष्यों के आधार पर परखी जाएगी।
फिलहाल इस मामले से बुलंदशहर पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। हालांकि, आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
