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एक शाम,डाॅ.फ़ितरत अंसारी के नाम,काव्य गोष्ठी का आयोजन

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अदब की वादियों के फूल ख़ुश्बूदार थे फ़ितरत: कौसर बर्नी

सिकंद्राबाद: शहरे तफ़्ता के मशहूर उस्ताद शायर डॉक्टर फ़ितरत अंसारी मरहूम की याद में “एक शाम फितरत अंसारी के नाम” का आयोजन उनके निवास स्थान मौहल्ला सोगिया वाड़ा में किया गया। जिसकी सदारत डॉक्टर ज़की तारिक़ बागपती ने की और संचालन डॉक्टर अता उल्लाह अंसारी ने किया। ताबिश खैराबादी मुख्य अतिथि ग्रुप में सम्मिलित हुए।

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉक्टर सैफुल्लाह आबिद ने नाते पाक से किया। उसके बाद डॉक्टर फ़ितरत अंसारी के बड़े पुत्र अमानुल्लाह खालिद ने डॉक्टर फ़ितरत अंसारी की शायरी और उनके जीवन संघर्ष पर प्रकाश डाला।
शायरों का पसंदीदा कलाम पाठकों की सेवा में प्रस्तुत है-

जुनूँ के जंगलों में पेड़ सायादर थे फ़ितरत
अदब की वादियों के फूल ख़ुश्बूदार थे फ़ितरत
सिकंदराबाद के ग़ालिब कहा करते थे सब उनको
हमारे दौर के इक बा हुनर फ़नकार थे फ़ितरत
– ऐन मीम कौसर बर्नी

इताब ओ क़हर का हर इक निशान बोलेगा
मैं चुप रहा तो शिकस्ता मकान बोलेगा
अभी हुजूम है इसको जुलूस बनने दे
तेरे ख़िलाफ़ तेरा मेज़बान बोलेगा
– डाॅ.ज़की तारिक़ बाग़पती

इलज़ाम न आ जाए परस्तिश का बुतों की
यूँ हमने तराशे हैं ख़ुदा और तरह के
पूछा जो ख़्याल आते हैं क्या मेरी तरह ही
बे साख़्ता दिलबर ने कहा और तरह के
– अमानउल्लाह ख़ालिद

सोई है, और महवे ख़्वाब नहीं
क़ौमे मुस्लिम तेरा जवाब नहीं
सारी दुनिया में हो रही रुस्वा
फिर भी तौफ़ीक़े एहतसाब नहीं
– मक़सूद जालिब

किस क़दर ज़माने में बेबसी के साये हैं
आदमी नहीं लेकिन आदमी के साये हैं
– डाॅ.सैफ़उल्लाह आबिद

बस इक सदा है, अज़ाँ नहीं है
दिलों में कोई धुंआ नहीं है
ख़ुदा से मिलने का शौक़ है बस
मगर ये हसरत जवाँ नहीं है
– डाॅ.अता इब्ने फ़ितरत

दुश्मन भी बा उसूल बनाये हैं हमने शाद
कमज़र्फ़ दोस्तों पे भरोसा नहीं किया
– ज़ुबैर शाद

रब की रज़ा के वास्ते करना है हर अमल
रखनी हैं हम को नेकियाँ दरिया में डाल के
डाॅ.हाफ़िज़ ज़ाकिर

इन के अलावा ताबिश खैराबादी और शाहनवाज़ ग़ाज़ियाबादी ने भी अपने कलाम से खूब वाह वाह लूटी।
इस अवसर पर जमाल अब्दुल नासिर अंसारी, मौहम्मद इकबाल खान, हाजी वासिफ़ अंसारी, मुस्तकीम गाजी, अख्तर अंसारी, गुड्डू अंसारी, असरार अहमद, अमजद अंसारी, सलीम सैफी, हालिब अंसारी, साहिल अंसारी एडवोकेट शरजील अंसारी, यामीन अंसारी,बाबर अंसारी रहे।

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