सिकन्दराबाद: फाल्गुन माह के पावन अवसर पर शहर भर में होली मिलन समारोहों का आयोजन हो रहा है। इसी क्रम में 14 मार्च की शाम 5 बजे दनकौर तिराहे के पास स्थित रानी वाला मंदिर (बलदेव कृष्ण मंदिर) में 43वां होली मिलन समारोह हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

कार्यक्रम की भव्य शुरुआत
समारोह का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना से हुआ, जिसे पंकज तायल ने अपनी मधुर आवाज में प्रस्तुत किया। इसके बाद गणमान्य व्यक्तियों ने होली पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर चर्चा
गणमान्य वक्ताओं ने होली के पौराणिक महत्व को बताते हुए कहा कि यह त्योहार भक्त प्रह्लाद की भगवान भक्ति और हिरण्यकश्यप के अहंकार के अंत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं बल्कि प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का प्रतीक भी है।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और भक्ति भाव
कार्यक्रम में कविता पाठ और भाषणों के माध्यम से होली के महत्व को उजागर किया गया। इसके बाद भगवान श्री बलदेव कृष्ण की आरती के साथ समापन हुआ। सभी उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाया और गले मिलकर होली की शुभकामनाएँ दीं।
गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
इस समारोह का मंच संचालन सेवा निवृत्त शिक्षक शिव कुमार सजल ने किया और अध्यक्षता सलेख चंद वैद्य ने की। इस अवसर पर डा. रजनीश,एडवोकेट हरेंद्र यादव, राजीव गोयल,भगवत प्रसाद, पंकज तायल,पं.धनश्याम, बलदेव भटनागर,मनमोहन भटनागर,अभिषेक भटनागर, खेमचंद पिपली सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
फूलों की होली खेलकर किया समापन
कार्यक्रम के अंत में सभी लोगों ने फूलों की होली खेली और पारंपरिक रूप से एक-दूसरे को गले लगाकर होली की शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का संदेश दिया और होली पर्व को उल्लासपूर्ण माहौल में मनाया।
