सिकंदराबाद में आर्मी भर्ती के अफिडेविट पर एसडीएम के सिग्नेचर न मिलने से युवाओं की ज्वाइनिंग अटकी। दस्तावेज़ों में अंतर का आरोप, युवाओं में नाराज़गी।
सिकंदराबाद : भारतीय सेना में चयनित होने के बाद ज्वाइनिंग की तैयारी कर रहे सिकंदराबाद क्षेत्र के कई युवाओं का भविष्य एक हस्ताक्षर के कारण अधर में लटक गया है। आरोप है कि एसडीएम दीपक कुमार पाल पिछले चार दिनों से भर्ती से जुड़े अनिवार्य अफिडेविट पर साइन नहीं कर रहे, जिसके चलते युवाओं की ज्वाइनिंग प्रक्रिया ठप पड़ी है।

चार दिन से तहसील के चक्कर, डिस्पैच डेट पर मंडरा रहा खतरा
चयनित युवाओं ने बताया कि उनकी 6 दिसंबर की डिस्पैच डेट निर्धारित है और दस्तावेज़ों का सत्यापन 30 नवंबर तक जमा करना अनिवार्य है। लेकिन एसडीएम के हस्ताक्षर न मिलने से अफिडेविट पूरे नहीं हो पा रहे हैं।
एक उम्मीदवार ने बताया,
“आज 28 तारीख है। चार दिन से तहसील के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन एसडीएम साफ कह रहे हैं कि वे साइन नहीं करेंगे।”
“मां का नाम कैसे प्रमाणित करूं?” — एसडीएम पर गंभीर आरोप
युवाओं का आरोप है कि एसडीएम ने मां के नाम के अंतर—हेमलता और हेमलता देवी—का हवाला देते हुए दस्तावेज़ साइन करने से इंकार कर दिया। जब उम्मीदवारों ने प्रक्रिया पूछी कि किस अधिकारी से प्रमाण पत्र लाया जाए, तो एसडीएम ने कथित तौर पर कहा—
“मैं कोई प्रोसीजर नहीं बताऊंगा, और न ही सिग्नेचर करूंगा।”
“आर्मी जाकर बोल दो कि मैं साइन नहीं करूंगा” — उम्मीदवारों का दावा
युवाओं ने दावा किया कि जब उन्होंने समस्या समझाने की कोशिश की, तो एसडीएम ने अपमानजनक लहज़े में कहा—
“आर्मी जाकर बोल दो कि मैं साइन नहीं करूंगा। तुम्हारा भविष्य खराब हो जाए, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।”
इससे नाराज़ युवाओं ने तहसील परिसर में “ऐसा SDM नहीं चाहिए” के नारे भी लगाए।
समाधान की तलाश में युवाओं की अपील— ‘ज्वाइनिंग न छूटे’
लंबे समय से समाधान न मिलने पर उम्मीदवार आज जिलाधिकारी से मिलने पहुंचे। युवाओं की मांग है कि
- उनकी ज्वाइनिंग डेट प्रभावित न हो
- आवश्यक अफिडेविट समय रहते साइन कराए जाएँ
- भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक अड़चनें न लगाई जाएँ
युवाओं का कहना है कि उन्हें देश की सेवा का अवसर मिला है, लेकिन एक अधिकारी की वजह से उनका भविष्य संकट में है। उन्होंने प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप की मांग की है।
एसडीएम दीपक कुमार पाल ने बताया कि सिग्नेचर के लिए पहुंचे युवाओं के दस्तावेज़ों में नाम को लेकर अंतर पाया गया है। कुछ दस्तावेज़ों में केवल नाम दर्ज है, जबकि अन्य में नाम के साथ ‘कुमार’ लिखा हुआ है। एसडीएम के अनुसार सभी दस्तावेज़ों में नाम की एकरूपता आवश्यक है, तभी फाइलों पर सिग्नेचर की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
