सिकंदराबाद में राजकीय अस्पताल की इमरजेंसी वार्ड प्रभारी ने मजरूबी चिट्ठी से मेडिकल करने से इनकार कर दिया। पुलिस और प्रशासन ने इस नए नियम पर हैरानी जताई। एसडीएम ने जांच के आदेश दिए।
सिकंदराबाद: राजकीय संयुक्त चिकित्सालय की इमरजेंसी वार्ड प्रभारी द्वारा मजरूबी चिट्ठी के आधार पर मेडिकल करने से इंकार करने का मामला सामने आया है। शुक्रवार देर शाम पारिवारिक हिंसा की शिकार एक महिला को जब पुलिस ने मेडिकल के लिए अस्पताल पहुंचाया, तो वहां वार्ड प्रभारी ने जीडी या एनसीआर नंबर की मांग करते हुए मेडिकल करने से साफ इनकार कर दिया।


घटना माजरा मुकुंदगढ़ी निवासी दीपिका के साथ हुई, जिसे उसके पति ने बुरी तरह पीटकर घायल कर दिया था। पुलिस जब पीड़िता को अस्पताल लाई, तब इमरजेंसी प्रभारी ने “मजरूबी चिट्ठी” को अस्वीकार कर दिया और कहा कि बिना जीडी नंबर के मेडिकल नहीं होगा। इस दौरान दर्द से कराह रही पीड़िता को करीब आधे घंटे तक इलाज नहीं मिला।

वार्ड प्रभारी का कहना था कि शुक्रवार को करीब 40 लोगों को इसी वजह से लौटा दिया गया। वहीं महिला पुलिसकर्मियों ने बताया कि पहले कभी मेडिकल के लिए इस तरह का कोई नियम लागू नहीं था।

इस पर एसडीएम दीपक कुमार पाल ने भी हैरानी जताते हुए कहा, “मजरूबी चिट्ठी से मेडिकल होता आया है, यह नया नियम समझ से परे है। मामले की जांच कराई जाएगी।”
प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने भी इस रवैये पर सवाल उठाए हैं और इसे बेहद असंवेदनशील व गैरकानूनी बताया है। आम जनता के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बन गई है कि यदि मजरूबी चिट्ठी भी अब अस्वीकार की जाएगी, तो पीड़ितों का तत्काल इलाज कैसे सुनिश्चित होगा?
