कलियुग में नाम संकीर्तन ही जीव कल्याण का सबसे सरल मार्ग : राकेश कृष्ण शास्त्री
सिकंदराबाद: ग्राम भराना में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान समारोह का सप्तम दिवस पर विधिवत समापन हो गया। कथा समापन अवसर पर वृंदावन से पधारे कथा व्यास आचार्य पंडित राकेश कृष्ण शास्त्री को प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
कथा के अंतिम दिन आचार्य राकेश कृष्ण शास्त्री ने कहा कि अन्य युगों में तप, यज्ञ और कठोर साधना से ही मुक्ति और शांति प्राप्त होती थी, लेकिन कलियुग में भगवान के नाम का संकीर्तन ही जीवों के कल्याण का सबसे सरल और सुगम उपाय है। उन्होंने कहा कि भगवान के चरणों में पूर्ण समर्पण करने वाला व्यक्ति सभी प्रकार के ऋणों से मुक्त हो जाता है।
इस अवसर पर वेदमूर्ति स्वामी फलाहारी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि संसार में अत्यधिक अपेक्षाएं और आशाएं ही दुख का प्रमुख कारण हैं। यदि व्यक्ति किसी से अपेक्षा न रखे तो जीवन में सुख और शांति बनी रहती है।
वहीं आचार्य पंडित आशीष उपाध्याय ने श्रीमद्भागवत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भागवत अमृत इतना दुर्लभ और महान है कि देवता भी इसके बदले अमृत देने को तैयार हो गए थे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को समय-समय पर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण और आयोजन करना चाहिए।
कथा समापन के दौरान श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा की गई। मधुर भजनों से पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा। आयोजकों ने बताया कि शुक्रवार सुबह 9 बजे हवन तथा दोपहर 12 बजे से विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें अधिक से अधिक संख्या में श्रद्धालुओं से प्रसाद ग्रहण करने की अपील की गई है।
इस दौरान वेदमूर्ति स्वामी फलाहारी महाराज, आचार्य पंडित आशीष उपाध्याय, आचार्य पंडित सुनील पाराशर, कपिल हवलदार, खेमचंद कैप्टन, रामगोपाल भगत, ब्राह्मी सिंह हवलदार, प्रमोद गिरी, प्रेमपाल, रमेश ठेकेदार, मस्तराम, सुनील एडवोकेट, राजकुमार शर्मा, हरिश्चंद्र हवलदार, बलवीर, पीतम मास्टर सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। कथा के समापन पर पुष्प वर्षा एवं प्रसाद व्यवस्था में अंकित, पवन, अशोक, छोटू, आदेश और मिंटू का विशेष सहयोग रहा।
