सिकंदराबाद: आर्यावर्त विश्व सनातन विकास परिषद के संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी आशीष कृष्णानंदाचार्य महाराज ने कहा कि सनातन धर्म में कथा कहने का अधिकार हर उस व्यक्ति को है, जो श्रद्धा और आस्था से जुड़ा हुआ हो, लेकिन कथा के मंच से अश्लीलता, भ्रामक बातें और गोत्र छुपाकर प्रवचन देना गलत है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसे कथा वाचकों पर परिषद सख्त कार्रवाई करेगी और आवश्यकता पड़ने पर मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा।
स्वामी आशीष ग्राम भराना स्थित श्री नर्मदेश्वर महादेव आश्रम में आयोजित श्री शतचंडी महायज्ञ के पंचम दिवस पर उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने यज्ञशाला में परिक्रमा की और आहुति अर्पित की।
स्वामी ने इटावा की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “कथा कोई भी सनातनी कर सकता है, लेकिन मर्यादा का पालन अनिवार्य है। कुछ कथावाचक भगवान तक को नहीं छोड़ते, अनाप-शनाप प्रवचन करते हैं। मोरारी बापू जैसे प्रसिद्ध कथावाचकों द्वारा ‘सूतक’ में कथा कहना हिंदू धर्म के 16 संस्कारों के विरुद्ध है और परिषद इसकी घोर निंदा करती है।”
उन्होंने चेताया कि समाज को ऐसे कथावाचकों से सतर्क रहना चाहिए और सुनियोजित जांच-पड़ताल के बाद ही कथा जैसे धार्मिक आयोजनों में आमंत्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा, “कोई भी व्यक्ति अगर भारत के किसी भी कोने में सनातन संस्कृति के विरुद्ध बोलेगा, तो परिषद उसी राज्य में उसके खिलाफ केस दर्ज कराएगी।”
स्वामी ने जीवन की एक सुंदर तुलना करते हुए कहा कि “चींटी और मनुष्य दोनों जीवनभर संग्रह करते हैं, पर उपभोग कम ही कर पाते हैं। समझदार मनुष्य को चाहिए कि वह समय रहते दान-परोपकार द्वारा अपने परिग्रह को परमार्थ में बदल दे।”
इस अवसर पर परिषद के राष्ट्रीय संरक्षक आश्रम महंत वेद मूर्ति स्वामी फलारी महाराज, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष कृष्णकांत महाराज, यज्ञाचार्य सुनील पाराशर तथा आयोजन समिति के पदाधिकारी जगत प्रधान, धर्मेंद्र प्रधान, अनिल, गोविंद, जीते, अरविंद, रिंकू, पवन, कैप्टन खेमचंद, प्यारे लाल सहित बड़ी संख्या में ग्राम भराना और आसपास के श्रद्धालु उपस्थित रहे और आयोजन को सफल बनाने में विशेष भूमिका निभाई।
