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सिकंदराबाद: डंपिंग ग्राउंड विवाद से सफाई व्यवस्था ठप, ग्रामीण-प्रशासन आमने-सामने

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सिकंदराबाद:  डंपिंग ग्राउंड को लेकर ग्रामीणों और नगर पालिका प्रशासन के बीच विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों के कड़े विरोध के चलते पिछले कई दिनों से नगर का कूड़ा नहीं उठ पा रहा है, जिससे पूरे शहर में गंदगी और बदबू फैल गई है। हालात ऐसे हैं कि आम जनता इस समस्या से बुरी तरह परेशान है, वहीं ग्रामीण अपनी सेहत और पर्यावरण का हवाला देते हुए कूड़ा डालने देने को तैयार नहीं हैं।

कूड़े के पहाड़ और जहरीले धुएं से भड़का विरोध

क्षेत्र के जोली गेट स्थित डंपिंग ग्राउंड पर लंबे समय से नगर का कूड़ा डंप किया जा रहा है। कूड़ा निस्तारण के लिए प्रशासन ने करोड़ों रुपये खर्च कर मशीनें तो लगवाईं, लेकिन उनके चालू न होने से यहां कूड़े के बड़े-बड़े ढेर लग गए। हाल ही में इन ढेरों में आग लगने से जहरीला धुआं फैल गया, जिससे आसपास के गांवों में लोगों का जीना मुश्किल हो गया। इसी के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने कूड़ा डालने जा रहे नगर पालिका के वाहनों को रोकते हुए धरना शुरू कर दिया।

प्रशासन ने दिया आश्वासन, ग्रामीण नहीं माने

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम दीपक कुमार पाल ने ईओ और ग्रामीणों के साथ डंपिंग ग्राउंड का निरीक्षण किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि कूड़े में लगी आग को बुझाया जाएगा और वैकल्पिक डंपिंग ग्राउंड की सड़क तैयार होने तक यहीं कूड़ा डाला जाएगा। साथ ही स्थायी समाधान के लिए प्रशासन को समय देने की बात कही।

हालांकि, भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों और ग्रामीणों ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि नगर का कूड़ा नगर की सीमा के भीतर ही निस्तारित किया जाए। ग्रामीणों का सवाल है कि शहर की गंदगी का खामियाजा गांव के लोग क्यों भुगतें।

आग बुझाने का प्रयास, सफाई बहाली की कोशिश

एसडीएम के निर्देश पर नगर पालिका की मशीनों और फायर ब्रिगेड की मदद से कूड़े के ढेर में लगी आग पर काबू पाने का प्रयास जारी है। प्रशासन की कोशिश है कि हालात सामान्य कर जल्द से जल्द कूड़ा डंपिंग दोबारा शुरू कराई जाए, ताकि शहर की सफाई व्यवस्था पटरी पर लौट सके।

कई लोग रहे मौजूद

इस दौरान भारतीय किसान यूनियन (अनाज) के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बिन्नू अधाना सहित कई पदाधिकारी और ग्रामीण मौजूद रहे। फिलहाल डंपिंग ग्राउंड को लेकर ग्रामीण और प्रशासन आमने-सामने हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।


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