बुलंदशहर: प्रधान डाकघर में मंगलवार को सीबीआई टीम ने आठ घंटे से अधिक तक छापेमारी की। इस छापेमारी के दौरान सीबीआई अधिकारियों ने डाकघर में तैनात सेवानिवृत्त कर्मचारियों से पूछताछ की,साथ ही टीम कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त कर अपने साथ ले गई। सीबीआई की छापेमारी के तुरंत बाद ही डाकघर के अधीक्षक ने खुद को गोली मार ली और गोली लगने के बाद उसकी मौत हो गई है। सीबीआई की टीम ने 2016 से लेकर अब तक के सभी कर्मचारियों से संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच की। बताया जा रहा है कि सीबीआई ने डाकघर के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी की शिकायत के बाद जांच की। सेवानिवृत्त कर्मचारी ने अपनी शिकायत में डाकघर के अधिकारियों पर भ्रमण भत्ते के बिल पास न करने और पांच लाख रुपये रिश्वत मांगने की शिकायत की थी। इसके अलावा बताया यह भी जा रहा है कि डाक अधीक्षक द्वारा कर्मचारियों से सारे कामों के लिए रिश्वत मांगी जाती थी।
प्रधान डाकघर पर सीबीआई की टीम ने खंगाली फाइलें
बुलंदशहर के प्रधान डाकघर में मंगलवार को सीबीआई की दो सदस्यीय टीम ने जांच की। टीम ने वर्ष 2016 से अब तक के कर्मचारियों से संबंधित दस्तावेजों की जांच की। विभाग के एक सेवानिवृत्त कर्मी ने कई अन्य कर्मियों के भ्रमण भत्ते का बिल पास न करने के मामले में शिकायत के बाद जांच टीम आने की बात कही। विभागीय अधिकारी इसे सीबीआई की जगह विजिलेंस टीम बता नियमित ऑडिट करने की बात कह रहे हैं। नगर के प्रधान डाकघर में मंगलवार दोपहर सीबीआई की टीम पहुंची और डाक अधीक्षक कार्यालय में मौजूद कर्मियों से पूछताछ शुरु की। इस दौरान टीम के साथ आए सुरक्षाबलों ने कार्यालय को अपने कब्जे में ले लिया। रात करीब नौ बजे तक भी टीम शाखा डाकपाल पदों पर हुई नियुक्तियों, लीप टूर कन्वेंस (एलटीसी-डाकघर में छुट्टियों के दौरान प्रत्येक वर्ष कर्मचारियों को मिलने वाले भ्रमण भत्ते), गबन, चार्जशीट संबंधी फाइल खंगालती रही।
विभाग के सेवानिवृत्त कर्मी बनवारीलाल ने बताया कि भ्रमण भत्ते का बिल पास नहीं हुआ। कई बार मांग करने पर रिश्वत की मांग की गई। रिश्वत मांगे जाने पर इसकी शिकायत सीबीआई कार्यालय में की। बता दें कि शिकायतकर्ता 31 मार्च 2022 को सेवानिवृत्त हुए। वहीं, करीब पांच लाख रुपये के बिल पास न करने पर शिकायत की बात कही। सिकंदराबाद डाककर्मी सतीश का आरोप है कि डाक अधीक्षक ने निर्धारित से अधिक गांव में डाक वितरण करवाने के बाद अतिरिक्त भुगतान की धनराशि का आधा हिस्सा रिश्वत के तौर पर मांगा। इस संबंध में उच्च अफसरों से शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि डाक अधीक्षक बिना रिश्वत के कोई कार्य नहीं करते हैं। विभागीय कर्मियों का भी कहना है कि टीम एक घोटाले की जांच करने आई है। लेकिन विभागीय अफसर इसे नियमित ऑडिट करना बता रहे हैं। फाइलों की जांच टीम पूरी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी।

गौरतलब है कि डाकघर अधीक्षक की मौत के बाद से वहां एक सुसाइड नोट भी मिला है। अपने सुसाइड नोट में टीपी सिंह ने लिखा है कि कुछ कर्मचारी गलत कार्यों के लिए दबाव बना रहे थे,इसलिए सुसाइड कर रहा हूं। बता दें, शुरुआत में डाकघर के अधिकारियों ने सीबीआई की इस जांच को विजिलेंस टीम की नियमित ऑडिट का हिस्सा बताते हुए खारिज कर दिया था। लेकिन एसएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि उन्हें सीबीआई के छापेमारी की जानकारी मिली है।हालांकि सीबीआई के अधिकारियों की तरफ से किसी भी तरह की जांच की पुष्टि अभी तक नहीं की गई है।
