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सिकंदराबाद: भगवान के तीन धाम वृंदावन, मथुरा और द्वारका हैं : आचार्य राकेश कृष्ण शास्त्री

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सिकंदराबाद: ग्राम भराना में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस आचार्य पंडित राकेश कृष्ण शास्त्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान के तीन प्रमुख धाम श्रीधाम वृंदावन, श्रीधाम मथुरा और श्रीधाम द्वारका हैं। इन तीनों धामों के समस्त पार्षद एवं परिकर नित्य और सच्चिदानंद स्वरूप हैं।

उन्होंने कहा कि वृंदावन में श्रीदामा, मधुमंगल, नंद बाबा और यशोदा मैया, मथुरा में अक्रूर और उद्धव तथा द्वारका में रुक्मिणी, सत्यभामा आदि भगवान के नित्य परिकर हैं। जब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं तो अपने समस्त परिकरों के साथ ही आते हैं। इसे समझाने के लिए उन्होंने रास मंडली का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे रासाचार्य अकेले नहीं आते, बल्कि पूरी मंडली विभिन्न पात्रों की भूमिका निभाती है, उसी प्रकार भगवान भी अपने दिव्य पार्षदों के साथ अवतरित होते हैं।

आचार्य ने कहा कि इस संसार रूपी रंगमंच पर सूत्रधार जिसको जो भूमिका सौंपता है, वही उसका अभिनय करता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का निर्वहन श्रद्धा और समर्पण भाव से करना चाहिए।

कथा के दौरान वेदमूर्ति स्वामी फलारी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि धर्म का उद्देश्य केवल धन-संपत्ति की प्राप्ति नहीं है, बल्कि अपवर्ग अर्थात मोक्ष की प्राप्ति है। उन्होंने कहा कि संसार में स्त्री, पुरुष, संत, ब्राह्मण और क्षत्रिय जैसे अनेक वर्ग हैं, लेकिन जहां पहुंचने के बाद सभी भेद समाप्त हो जाते हैं, वही अपवर्ग या मोक्ष है। धर्म का वास्तविक उद्देश्य इसी दिव्य अवस्था की प्राप्ति कराना है।

इस अवसर पर आचार्य पंडित आशीष उपाध्याय ने कथा के समय में परिवर्तन की जानकारी देते हुए बताया कि अब कथा प्रतिदिन प्रातः 9 बजे से 12 बजे तक तथा सायंकाल 4 बजे से 7 बजे तक आयोजित होगी। सोमवार को कथा में भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग होगा, जिसका श्रद्धालु लाभ उठा सकते हैं।

कथा में परीक्षित लोकेश ठेकेदार, खेमचंद कैप्टन, ब्रह्म सिंह हवलदार, रामगोपाल महाशय, रोहित, प्रवीण, आदेश, अनिल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


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