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सिकंदराबाद: कैकई की जिद और राम का वनवास, रामलीला में गूंजा रघुकुल वचन

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सिकंदराबाद रामलीला महोत्सव में कैकई कॉप भवन वचन लीला का मंचन हुआ। राजा दशरथ द्वारा श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास देने के प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया।


सिकंदराबाद: नगर के मोहल्ला रामवाड़ा स्थित रामलीला मैदान में चल रहे रामलीला महोत्सव में रविवार को कैकई कॉप भवन वचन लीला का मंचन किया गया। श्री श्यामा श्याम ब्रज लोक लीला संस्था वृंदावन के व्यास दामोदर शर्मा के निर्देशन में कलाकारों ने भावपूर्ण प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम का शुभारंभ आरती के साथ हुआ। आरती गाजियाबाद से वैश्य समाज की अध्यक्ष संगीता महेश्वरी, विवेकानंद सरस्वती शिशु मंदिर सिकंदराबाद की प्रधानाचार्या एकता महेश्वरी, गौरव, विरोनिका, आराध्या, विहान व जितेंद्र खड़गवंशी ने परिवार सहित की।

मंचन में दर्शाया गया कि कैसे मंथरा के बहकावे में आकर रानी कैकई ने राजा दशरथ से भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास और भरत को राजगद्दी देने का वरदान मांगा। दशरथ ने कैकई को समझाने का प्रयास किया, लेकिन उनकी जिद के आगे विवश होकर कहा –”रघुकुल रीति सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई” इसके साथ ही उन्होंने भरत को राजपाट और श्रीराम को वनवास की घोषणा कर दी।

इस अवसर पर नगर के सैकड़ों लोग मौजूद रहे और लीला का आनंद उठाया। मंचन के दौरान श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर कलाकारों की प्रस्तुति पर तालियां बजाईं।

कार्यक्रम में दिनेश चक्की वाले, राकेश मोहन सर्राफ, नितिन गर्ग एडवोकेट, विपुल गर्ग, संजीव कुमार आचार्य सहित भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


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